Varicose Veins-Meaning, Causes, Symptoms, Home Treatment ! varicose veins treatment in hindi

varicose veins in hindi ! varicose veins treatment in hindi


वैरिकोज वेन्स पैरों की या
जांघों पर फूली और तनी हुई नसों की मॉजूदगी हम में से कइयों के‍ लिए चिंता और कष्‍ट
का कारण बन जाती है। इन उभरी हुई रगों से न केवल शारिरिक विभिन्‍नता उत्‍पन्‍न
होती है
, आगे
चलकर ये दर्द और अन्‍य कठिनाइयों के द्वारा जिंदगी को तकलीफ दायक बना देती हैं।

varicose veins in hindi



वैरिकोज वेन्स  का मतलब । varicose veins meaning in hindi

वैरिकोज वेन्स को आम भाषा में अपस्‍फीत
शिराएं कहते है। इस का अर्थ होता है त्‍वचा की सतह का फूली
, तनी , उभरी और अधिक खून से भरी शिराएं या नसें।

शिराएं क्‍या है( veins) –

शरीर में अशुद्ध रक्‍त पतली
रक्‍त वाहिनयों जिन्‍हें शिरा कहा जाता है के द्वारा वापस ह्दय में ला जाया जाता
है जहां उस के शुद्धिकरण की प्रक्रिया होती है। शिराओं का आकार भी हृदय के करीब
आते आते बढ़ जाता है। पैरों में भी शिराओं की एक विशेषता होती है इन के भीतर थोड़ी
थोडी दूरी पर वाल्‍व मौजूद होते हैं जो एक ही दिशा मे खुलते हैं मगर उस रक्‍त केा
हृदय के विपरीत दिशा में पुन: नहीं लौटने देते। मगर पैरों की सतह पर भी कुछ शिराएं
मौजूद होती हैं जिन पर इन मांस पेशियों के फैलाव और संकुचन का कोई प्रभाव नहीं
पड़ता मगर ये भीतरी शिराओ से एक सहायक या मध्‍यस्‍थ शिरा द्वारा जुड़ी होती है।
भीतरी शिराएं इन में से रक्‍त को अपनी ओर खींच लेती हैं यह रक्‍त बहारी शिराओं से
मध्‍यस्‍थ शिरा में पहुंचता है उसे में भी एकतरफा वाल्‍व मौजूद होते हैं
,अत: बाहरी शिराओं का
रक्‍त भीतरी शिराओं में तो चला जाता है
, मगर वहां से वापस
नहीं लौट पाता।

वैरिकोज वेन्स varicose veins की बीमारी इन्‍हीं तीन स्‍थानों बाहरी शिरा, मध्‍यस्‍थ शिरा, भीतरी शिरा
में से किसी एक अथवा तीनों में उत्‍पन्‍न विकारों की वजह से होती है
, अधिकांशत: इस रोग का कारक वह वाल्‍व होता है जो रक्‍त को केवल एक ही दिशा
में बहने देता है।

वैरिकोज वेन्स varicose veins की मरीज कौन हो सकते हैं-

  • र्भवती
    स्त्रियां
  • गरम जलवायु के क्षेत्र मे या भट्ठी के नजदीक
    काम करने वाले लोग।
  • प्रसव के दौरान या किसी दुर्घटना या किसी
    शल्‍यक्रिया के कारण पैरों की भीतरी शिराओं में रक्‍त्‍ का थक्‍का जम जाने की वजह
    से।
  • वे लोग जो अपने रोजगार की वजह से घंटों खड़े
    रहते हैं या जिन्‍हें अपने पैरों की मांसपेशियों का अधिकतर इस्‍तेमाल करना पड़ता
    है जैसे ट्रैफिक पुलिस
    , पोस्‍टमैन, रिक्‍शावाले या दर्जी।
  • पुरूषों के बनिबस्‍त स्त्रियां इस रोग का
    अधिक शिकार बनती हैं।

वैरिकोज वेन्स (varicose veins) होने के प्रमुख कारण-

वैरिकोज वेन्स इंसानों मे ही पाई
जाती है यह बीमारी इस अन्‍य दूसरे जीवों को नही होती है। वैरिकोज वेन्स बीमारी
होने के कारण निम्‍नलिखित है-

गर्भनिरोधक गोलियों का अत्‍यधिक
प्रयोग-

महिलाओं में आज के दौर में, जहां सीमित परिवार
सरकार और दंपतियों का लक्ष्‍य है
, वहां गर्भनिरोधक के रूप
में हारमोन युक्‍त गोलियों का चलन बहुत बढ़ गया है
, इन
गोलियों से शिराअें में मौजूद मांसपेशियों शिथिल हो जाती हैं
, जिसके फलस्‍वरूप शिराओं को फूलने के लिए अधिक जगह मिल जाती हैं।

जेनेटिक अनुवांशिक-

अक्‍सर देखा गया है कि एक ही
परिवार के कई सदस्‍य वैरिकोज वेन्स
(varicose veins)  रोग से ग्रसित होते हैं
जिस का अर्थ यही निकलता है कि बीमारी पीढ़ी दर पीढी चली आ रही है।

खान पान , डाइट-

ऐसा पाया गया है कि  पश्चिमी देशों के लोग जो कम फाइबर वाला खाना का
प्रयोग करते हैं उन में इस बीमारी की संभावना अधिक होती है इस की वजह यह है कि जिन
खाद्य पदार्थों में फाइबर की मात्रा कम होती है उन से बनने वाले मल देर से निकलता
हैं। अत: मल काफी समय तक आंत में ही जमा रहता है जो की शिराओं पर बेवजह दबाव डालती
है जिस की वजह से पैरों में मौजूद रक्‍त ह्दय तक पहूंच नहीं पाता। वेसे भी कान्‍सिपेशन
की वजह से मल निकालते समय पेट पर अतिरिक्‍त जोर देना पड़ता है जिसका असर सीधा
पैरों क शिराओं पर दिखाई देता हैं।

पश्चिमी कमोड का प्रयोग-

पश्चिमी देशों में मल त्‍याग
के लिए कमोड का उपयोग किया जाता है ऐसे में मल त्‍याग के लिए लगाया गया जोर सीधे
पैरों की शिराओं पर पड़ता है जबकि हमारे देश में नीचे बैठकर कर मल त्‍याग क्रिया
इस दबाव को पैरों की ओर नहीं जाने देती।

व्‍यायाम की कमी के कारण-

गाड़ी का अत्‍यधिक उपयोग मनुष्‍यों
को पैदल चलने का अवसर ही नहीं देता। पैदल चलन से फायदा यह है कि हमारे पैरों की
मांसपेशियां बार बार फैलती और संकुचित होती है इसकी वजह से शिराओं में मौजूद रक्‍त अपनी पूर्णता के साथ उपर चला जाता है मगर जो व्‍यक्ति अपने कार्य अथवा रोजगार की
वजह से पैदल नहीं चल पाते उन में इस बीमारी से पीडि़त हो जाने की संभावनाएं बढ़
जाती हैं।

अन्‍य दूसरे कारण-

वाल्‍व मे कोई जन्‍मजात विकार, पैरों की मांसपेशियों के
विकार और विकलांगता
, पेट में मौजूद ट्यूमर और भीतरी शिराओं के
भीतर खून के थक्‍के
blood clout जमा हो जाने पर भी ऐसे लक्षण
उत्‍पन्‍न हो सकते हैं
,

वैरिकोज वेन्स (varicose veins) के क्‍या लक्षण हैं ?varicose
veins symptoms in hindi-




कुछ व्‍यक्तियों
में इनकी मौजूदगी पैरों पर
, कुछ स्‍थानों में
टापुओं की तरह बिखरी पाई जाती है जहां वे नी‍ली मकड़ी की तरह दिखाई देने वाली शिराओं
के रूप में होती हैं तो कुछ में पूरे पैर में फूली और तनी हुई नीली शिराओं का जाल बिछा
पाया जाता है।

  • वैरिकोज वेन्स (varicose veins)  की
    शियाकत सर्वाधिक महिलाओं में होती है पैरों मे भारीपन और खिंचाव की शिकायत करती है
    दर्द की मात्रा दिन के ढलते ढलते और बढ़ जाती है ।
  • कुछ मरीजो को कुछ स्‍थानों पर तेज टीस का भी अहसास करते हैं टखने पर थोड़ी सूजन
    आ जाना या पैर की त्‍वचा में खुजली होना आम लक्षण है ।
  • कई बार मरीज बिस्‍तर पर लेटने के पश्‍चात पैरों में तीव्र दर्द भी महसूस करता
    है।
  • हालांकि यह बिमारी में पैरों को देखकर ही पता चल जाता हैं ।

वैरिकोज वेन्स का उपचार या इलाज । varicose veins treatment in hindi-

बीमारी के मूल कारण को जानने के
लिए मरीज की शारिरिक जांच

(Body test), रक्‍त परीक्षण (Blood Test), एक्‍स
रे
(X-ray ) और अल्‍ट्रासाउंड (UltraSound) जैसी जांच पद्धतियों भी मददगार सिद्ध होती हैं।

वैरिकोज वेन्स ट्रिटमेंट-

1-बिना
सर्जरी विधि ।
varicose veins home treatment in hindi

इस वैरिकोज वेन्स ट्रिटमेंट
में किसी तरह की कोई चीरफाड़ या इंजेक्‍शन इस्‍तेमाल नहीं किए जाते। इन से बीमारी की
वृद्धि एवं शिरियसनेश को रोका तो जा सकता है। मगर
वैरिकोज वेन्स (varicose veins) पूर्ण रूप से दूर नहीं किया जा
सकता । अत: बीमारी की प्रारंभिक अवस्‍था में यह ट्रिटमेंट या उपचार किये जा सकते हैं।
य‍ ह विधि इस प्रकार हैं-

  • पैरों को जब भी मौका मिलेजमीन से उंचा उठा कर या क म से कम जमीन के समानांतर रखेंबैठते समय पैरों को किसी स्‍टूल पर या कुरसी पर रखा जा सकता
    है उसी तरह सोते वक्‍त या तो पैरों के नीचे तकिया रख रकर सोएं।
  • तेजी से चलना या धीमें धीमे दौड़ना भी बेहद फायदेमंद साबित होता है। इससे खुन
    को हृदय की ओर बढ़ने में मदद मिलती है।
  • पैरों को उंचा उठा कर पंजों को चारों ओर घुमाने का व्‍यायाम करें।
  • अपना
    वजन कम करें
    देखा गया है कि जो व्‍यकित
    मोटे होते हैं उन में इस बीमारी से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • रबर या इलास्टिक के मोजे या पट्टे का इस्‍तेमाल करें।लचीले क्रेप बैंडेज को
    पैरों के पंजो से ले कर जांघ के उपरी भाग तक बांधने से शिराओं में रक्‍त्‍ को हृदय
    की ओर बढ़न के लिए अतिरिक्‍त सहायता मिलती हैं।
  • चुंबक चिकित्‍सा भी काफी लाभकारी होता है।

2- सुई या इंजेक्‍शन द्वाराvaricose
veins home treatment in hindi

इस से शिराओं पर सीधे कोई चीरफाड़
नहीं कि जाती पर चूंकि शरीर के भीतर सुई या इंजेक्‍शन का प्रवेश किया जाता है । इस
विधि में बाहृ शिरा के भीतर इंजेक्‍शन के द्वार एक ऐसी दवा का प्रवेश करवाया जाता है
जो शिरा में तेजी से सूजन पैदा करती है जिससे शरीर प्रतिरोधक क्षमता इस सूजन से लड़ने
के लिए वाल्‍व और शिरा की दिवारों को पूर्ण रूप से बंद कर देते हैं जिन की वजह से रक्‍त
का विपरीत दिशा में बहाव संभव नही हो पाता।

फायदा– इस विधि से वैरिकोज
वेन्स
(varicose veins)  कुछ सालों तक शांत रहता
है।

नुकसान– यह परमानेंट इलाज नहीं
है।साथ ही कुछ साइट इंफेंक्‍ट भी हो सकते हैं।

3-Accupunchar accupressar द्वारा
varicose veins home treatment in hindi

एक्‍युपंचर, या एक्‍युप्रेशर
विधि का भी प्रयोग किया जा सकता है जो
वैरिकोज वेन्स (varicose veins)  की बीमारी को ठीक करने का दावा करते हैं।


4-वैरिकोज वेन्स (varicose veins) का इलाज सर्जरी द्वारा । varicose veins home treatment in
hindi




सर्जरी या शल्‍य चिकित्‍या को दो
प्रकार की विधियो से ठीक किया जा सकता है-

  • 1- घुटने से ले कर जांघ तक पहूंचने
    वाली प्रमुख विकृत शिरा को ही निकाल दिया जाता 
    है।
  • 2-इस विधि में छोटे छोटे विकृत
    शिराओं को एक एक कर अलग कर लिया जाता है और उनके दोनों सिरे बांध
    , मध्‍य हिस्‍से को काट कर
    निकाल दिया जाता है।

यह विधि परमानेंट इलाज हैं इसके
मगर कुछ हानिकारण परिणाम हो सकते हैं।

वैरिकोज वेन्स (varicose veins) का इलाज न करने पर क्‍या होगा-

यह बीमारी आगे बढ़कर अनेक समस्‍या
पैदा कर सकती है जैसे-

  • बाहरी शिराओं में सूजन और रेडनेश
    आ जाती हैं।
  • एक्जिमा (खुजली, दर्द)
  • रक्‍त का  निकलना।
  • शिराओं
    में कैल्शियम जमा होने पर वे सख्‍त हो सकती हैं।
  • हड्डी
    में घाव हो जाना।
  • पैरों
    के पंजों में स्‍थायी विकृति आना।

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