Tribal dance of chhattisgarh ! छत्तीसगढ़ के जनजाति नृत्‍य

छत्तीसगढ़
जनजाति
(chhattisgarh tribes) से समृ‍द्ध राज्‍य है यहां लगभग 42 प्रकार की जनजाति पायी
जाती है की जनजाति के विभिन्‍न प्रकार नृत्‍य गीत नाटक एवं कई प्रकार की विधाये है
छत्तीसगढ़ में बस्‍तर क्षेत्र को जनजातियां की भूमि
(”tribal land”  bastar) कहा जाता
हे
(tribal dance
of  
bastar) सर्वाधिक
जनजाति इस क्षे त्र में ही है। इस पोस्‍ट में छत्तीसगढ़ के जनजा‍तियो के नृत्‍य (
tribal
dance of chhattisgarh)
पर एक नजर डाला गया है यह जानकारी cgvyapam
cgpsc one day state exam
में tribal
dance of chhattisgarh
के लिए अति महत्‍पवपूर्ण
साबित होगी।



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बिल्‍मा नृत्‍य- बैगा

  • विजयादशमी के दिन बिल्‍मा नृत्‍य किया जाता है।

 

करमा नृत्‍य- बैगा, उरां, कमार

  • सामान्‍य
    अवसर पर किया जाता  है।

 

लिंगोपाटा- परधान                  

 

मांदरी
नृत्‍य – मुरिया एवं मुडि़या
द्वारा

  • घोटूल के बाहर किया जाता है।
  • मांदरी नृत्‍य में नर्तक गायन नहीं करते केवल
    डांस करते है।

 

एबालतोर नृत्‍य- मुडि़या एवं मुरिया द्वारा

  • मड़ई मेले महोत्‍सव के समय अंगादेव के पूजा के
    समय एबालतोर नृत्‍य किया जाता है

 

ककसार
नृत्‍य- मुरिया, अबूझमारिया,
मुडि़या के द्वारा।

  • घोटूल
    देव लिंगोपेन की पूजा करने के दौरान ककसार
    नृत्‍य किया जाता है ककसान एक प्रकार का पर्व
    भी है।
  • ककसार के दौरान घो‍टूल परिसर मुडि़या जनजाति में
    जीवन साथी का चुनाव किया जाता है।

 

माओपाटा- मुडि़या मुरिया

  • शिकार के वक्‍त

 

घोटूल पाटा- मुरिया, मुडि़या के द्वारा

  • मृत्‍यु
    के अवसर पर किया घोटूल पाटा
    नृत्‍य किया जाता है।

 

हुलकी पाटा नृत्‍य- मुरिया, मुडि़या

  • सामान्‍य
    नृत्‍य की विधा

 

डंडा
नृत्‍य या सैला
नृत्‍य- बैगा, गोंड

  • दीपावली
    के समय

 

डंडारी
नृत्‍य- भतरा

  • होली
    के अवसर पर किया जाता है।

 

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सरहुल
नृत्‍य – उराव

  • साल वृक्ष में फूल लगने पर
    किया जाता है।          

 

पैडुल नृत्‍य- डोरला जनजाति

  • विवाह के अवसर पर किया जाता है

 

बार नृत्‍य- कंवर जनजाति

  • मनोरंजन के समय नृत्‍य किया जाता है

 

दमनच नृत्‍य- कोरवा

  • सबसे भयानक नृत्‍य के रूप्‍ में जाना जाता है
    साथ ही विवाह के अवसर पर भी किया जाता है

 

ढांढल नृत्‍य- कोरकु जनजाति द्वारा

 

थापड़ी नृत्‍य- कोरकु जनजाति

  • बैसाख माह में किया जाता है।

 

परब नृत्‍य- धुरवा

  • सैन्‍य नृत्‍य

 

भडम नृत्‍य- भारिया

  • सबसे लंबी समय तक चलने वाली नृत्‍य है

 

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पूस कोलांग- मुरिया

  • केवल पुरूषों के द्वारा किया जाता है

 

बायसन हार्न नृत्‍य या गौर सिंग नृत्‍य- माडि़या
एवं मारिया द्वारा

  • गोंचा पर्व में माडि़या जनजाति द्वारा भैंस के
    रिंग को लगाकर नृतय किया जाता है। मृतक स्‍तम्‍भ स्‍थापित करते है।
    बायसन हार्न नृत्‍य दण्‍डामी माडि़या के द्वारा प्रस्‍तुत
    किया जाता है।

 

पैडुल नृत्‍य- डोरला जनजाति द्वारा

  • विवाह के अवसर पर किया जाता है

 

ददरिया नृत्‍य- बैगा

  • द‍दरिया नृत्‍य के दौरान
    जीवनसाथी का चुनाव किया जाता है        

 

कोकटी- घोटा नृत्‍य- अबूझमाड़ीया द्वारा

  • अबूझमाडिया जनजाति में प्रचलित जात्रा में कोकटी
    घोडे का दृश्‍यांकन करते है इससे कुछ व्‍यकित चीते का मुखौटा पहनकर युवक युवतियां पर
    झपटने का अभिनय भी करते है।

डिटोंग या गेड़ी नृत्‍य- मुडि़या

  • डिटोंग
    में घोटूल क पुरूष सदस्‍य भाग लेते है।
  • इस
    नृत्‍य में भी नर्तक बांस के गेडी पर चढकर तेज गति से
    नृत्‍य करते है।

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