chhattisgarh peasant movement छत्तीसगढ़ में कृषक आंदोलन

छत्तीसगढ़  में कृषक आंदोलन chhattisgarh peasant movement

chhattisgarh peasant movement छत्तीसगढ़ में कृषक आंदोलन छत्तीसगढ़ में किसान आंदोलन


कृषक आंदोलन पृष्‍ठभूमि-
अंग्रेजी शासन की भूमि व्‍यवस्‍थापन के कारण सामन्‍ती प्रथा द्वारा किसानों का
शोषण किया जा रहा था। जिसे बेगार प्रथा कहते है। बेगार प्रथा के कारण किसान की
स्थिति खराब होते ही जा रही थी।

  • बेगार
    प्रथा का प्रथम विरोध
    – सेवता ठाकुर
  • प्रमुख
    केंन्‍द्र-
    राजनांदगांव Rajnandgao में किसानों द्वारा



किसान
आन्‍दोलन का कारण | reson for peasant movement-

  • बेगार
    प्रथा से त्रस्‍त
  • मालगुजारी
    प्रथा
  • लगान
    वृद्धि
  • महाजन
    शोषण
  • भूमिहीन
    हेतु भूमि

छत्तीसगढ़
के प्रमुख किसान आन्‍दोलन Major Chhattisgarh Peasant Movement-


1丨कण्‍डेल
नहर सत्‍याग्रह Kandel nahar satyagrah-

 1920 में प्रांरभ, पं. सुन्‍दर
लाल शर्मा नेत्वकर्ता जिसके कारण उन्‍हें राष्‍ट्रव्‍यापी प्रसिद्धी मिली।

कण्‍डेल
क्षेत्र धमतरी के प्रमुख व्‍यक्ति
– बाबू छोटेलाल श्रीवास्‍तव

आंदोलन
समर्थक
– पं. सुन्‍दरलाल शर्मा
, नारायण राव मेघावाले।

2
दिसम्‍बर 1920
को पं. शर्मा कलकत्‍ता जाकर महात्‍मा गांधी को आंदोलन करने के लिए
बुलाया ।

20
दिसम्‍बर 1920
 आंदोलन समाप्‍त।

रायपुर
के धमतरी तहसली पर रूद्री एंव माडमसिल्‍ली गांव में स्थित कंडेल नहर।

कारण Reason-
नहर अधिकारी के साथ गांव का पानी के लिए 10 वर्ष का समझौता हुआ। यह असफल रहा ।
गांव वालों पर पानी चोरी का आरोप लगाया गया । एवं 4050 रू अर्थदण्‍ड लगया गया। जिसका
छोटेलाल ने विरोध किया । और उस रात को बारिश होने के कारण खेत में पानी भर गया था।
इसीलिए उन्‍होने अर्थदण्‍ड नहीं दिया। अधिकारियों ने गांव के जानवरों को जब्‍त कर
बाजार में बेचना सुरू किया । कुछ समय बाद बाबू छोटेलाल उनके चचेरे भाई लाल जी एंव
किसान गिरफ्तार किये गये।

अब
प्रांतीय नेता भी इस आंदोलन में शामिल हो गये। रायपुर के डिप्‍टी कमिश्‍नर द्वारा
जांच करने पर अर्थदण्‍ड आधा कर दिया गया 2025 रूपये। किसानों ने देने से इंकार कर
दिया। बाद में जूर्माना माफ कर दिया। गांधी जी के आने के पहले ही यह आन्‍दोलन
समाप्‍त हो गया।


2丨दुर्ग
डोंडी किसान आन्‍दोलन Durg Dondi Kishan andolan-

1937 में डोंडीलोहारा एवं दुर्ग क्षेत्र में किसानों द्वारा
आन्‍दोलन किया गया ।




नेतृत्‍व
नरसिंह अग्रवाल बालोद narsingh agrawal balod

डोंडी
किसान आन्‍दोलन कारण-
दुर्ग डोडी दिवान मनीराम पाण्‍डेय का आतंक बड़ गया था। वह
बहुत अधिक कर ले रहा था। 28 अगस्‍त 1937 को विरोध हेतु मांली थोड़ी बाजार में
दिवान के विरोध में शिकायते कि गयी। नरसिंह अग्रवाल ने सत्‍याग्रह आरम्‍भ किया।
अंबागढ़ चौकी एवं पानाबरस चौकी में विद्राह फैल गया। 

दुर्ग
के वासुदेव देश मुख एवं सरयु प्रसाद अग्रवाल
,  पं. रत्‍नाकर झा ने दुर्ग में सत्‍याग्रह
प्रारंभ किया । वही डोंडी लोहारा में वली मुहम्‍मद सत्‍याग्रह प्रारम्‍भ किया गया
। इसके कारण लगभग 94 सत्‍याग्रही गिरफ्तार हुए। नरसिंह प्रसाद सरयु प्रसाद को
सिवनी जेल भेज दिया गया। मनीराम जो एक सत्‍याग्रही था उसके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज
किया गया।

श्री
त्रिवेणी लाल श्रीवास्‍तव  जो कि वकील
थे।  उन्‍होंने पैरवी कि  जिससे सरयु प्रसाद रिहा हुए।और पुन: सत्‍याग्रह
में लग गये। आन्‍दोलन आगे बढ़ा कुरूम कसा गांव में विशाल सभा का आयोजन किया गया। 9
दिन का उपवास रखा गया। जिसके बाद निस्‍तार नियम बना।


3丨छुई-खदान
आंदोलन chukhadan movement- 

  • 1938 में समारू बड़ई के नेतृत्‍व में हुआ।

कारण– 

  • कर बढ़ाने के विरोध में, तत्‍कालीन जमींदार के विरोध
    में।
  • कर
    न पटाओं आन्‍दोलन
    भी कहलता हैं।
इस प्रकार इस पोस्‍ट में
छत्तीसगढ केेइतिहास के अंतर्गत
 छत्तीसगढ़
में कृषक आंदोलन
  की
पूरी जानकारी दी गई ।
  

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