व्‍यापार वृद्धि मंत्र ।व्‍यापार बंधन मुक्ति का मंत्र

व्‍यापार वृद्धि मंत्र

व्‍यापार वृद्धि मंत्र ।। व्‍यापार बंधन मुक्ति का मंत्र ।।vyapar vridhi mantra

प्रथम विधि मंत्र 1-

व्‍यापार का दैनिक कार्य प्रारंभ करने से पूर्व य‍दि इस मंत्र का 108
बार उच्‍चारण करके दुकान खोलें और व्‍यापार का दैनिक कार्य प्रारंभ करें तो उस दिन
ब्रिकी बढ़ती है और किसी प्रकार का कोई उपद्रव या परेशानी नही आती। इस मंत्र को
सिद्ध करने की कोई आवश्‍यकता नहीं है। नित्‍य दुकान खोलने से पूर्व एक माला जपना
ही पर्याप्‍त है।

श्री लुल्‍ले महाशुक्‍ले कमलदल निवासे महालक्ष्‍म्‍यै नम: लक्ष्‍मी
माई सत्‍य की सवाई आवो माई करो भलाई
, ना करो तो समुद्र की दुहाई ऋद्धि – सिद्धि खावोमीट तो नौ नाथ चौरासी
सिद्धों की दुहीई।

 



द्वितीय विधि मंत्र 2

भंवरवीर तू
चेला मेरा खोल दुकान कहा कर मेरा उठै जो डंडी बिकै जो माल भंवरवीर की सौंह नहि
खाली जाय।

 

ब्रिकी बढ़ाने
के लिए यह अनुभूत मंत्र है। इसका प्रयोग केवल रविवार के दिन ही माना जाता है और 3
रविवार तक लगातार करने से सफलता मिलती है। प्रयोग इस प्रकार से है कि काले उड़द को
21 बार अभिमंत्रित कर
व्‍यापार स्‍थल पर डालें। ब्रिक्री में वृद्धि होगी।



व्‍यापार बंधन
मुक्ति का मंत्र

कभी कभी अचानक
ही व्‍यवसाय चौपट होता हुआ प्रतीत होता है। सम्‍भव है धन्‍धे की बरसत तन्‍त्र मन्‍त्र
से बांध दी गई हो। अगर ऐसा हो तो इस मंत्र का प्रयोग किया जाना चाहिए। तुरंत लाभ
मिलने लग जाता है।

 

ॐ  नमो आदेश
गुरू को वावन वार चौसठ सातऊ कलवा पाचऊ वड़वा जिन्‍न भूत परीत देव दानव दुष्‍ट मुष्‍ठ
मैली मशाण इन्‍हीं को कील कील नजर दीठ मूंठ टोना टारे लोना चमारी गाजे या धन्‍धे
दुकान की बरकत को बन्‍धन न छुड़ावे तो माता हिंगलाज की दहीई।

विधि
नवरात्रि में एक हजार जप से उक्‍त मन्‍त्र सिद्ध हो जाता है। मन्‍त्र सिद्धि के
समय धूप जलाना चाहिए। मन्‍त्र सिद्धि के बाद बालकों और कन्‍याओं को भोजन कराना
चाहिए।


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 बंधित दुकान में पांच नीबुओं को इस मन्‍त्र से
21 बार अभिमन्त्रित कर एक सूत्र में पिरों कर दुकान में टांकना चाहिए। सरसों के
कुछ दानों पर 21 मन्‍त्र पढ़कर दुकान में डालें।



रोजगार
बाधानाशक एवम् व्‍यापार वृद्धि कारक मन्‍त्र

ॐ नमो सात
समुद्र के बीच शिला जिस पर सुलेमान पैगम्‍बर बैठा सुलेमान पैगम्‍बर के चार
मुवक्क्लि पूर्व को धाया देव दानवों को बांधि लाया दूसरा मुवक्क्लि पश्चिम को धाया
भूत-प्रेत कूं बांधि लाया तीसरा मुवक्किल उत्‍तर को धाया अयुत पितृ को बांधि लाया
चौथा मुवक्किल दक्षिण को धाया डाकिनी शाकिनी को पकडि लाया चार मुवक्किल चहुं
दिशि धावें छलछिद्र कोऊ रहन न पावें रोग दोष को दूर भगावें शब्‍द सांचा
, पिण्‍ड कांचा, फुरो मंत्र ईश्‍वरो
वाचा।

यदि किसी का
धंधा ठप्‍प पड़ गया हो
, दुकान चलती नहीं हो,
व्‍यवसाय मंदा पड़ गया हो अथवा चलते व्‍यापार में विघ्‍न आने लग गये
हों तो उक्‍त शाबर मंत्र का विधिपूर्वक प्रयोग करने से अप्रत्‍याशित रूप से रोजगार
चलने लगा जाता है और व्‍यापार की समस्‍त बाधाएं नष्‍ठ हो जाती हैं।




विशेष प्रयोग-

यदि पूर्ण
श्रद्धा और विश्‍वास के साध इस प्रयोग को सम्‍पन्‍न कर लिया जावे तों कोई भी ताकत
व्‍यापार को वृद्धि करने से नहीं रोक सकती हैं इस प्रयोग को करने वाले साधक का व्‍यवसाय
दिन दूनी रात चौगनी तरक्‍की करने लग जाएगा।

प्रयोग इस
प्रकार है कि एक कपड़े के चार पुतले बनावें और इस मंत्र को पढ़कर उन चारों पुतलों
पर फूंक मारकर उन्‍हें अभिमंत्रित कर लेवें। तत्‍पश्‍चात अपने व्‍यावसायिक स्‍थ्‍ल
के चारों कोनों में एक एक पुतला उक्‍त मंत्र को पढ़ते हुए गाड़ देवें। इसके बाद
प्रतिदिन प्रात- व्‍यापार स्‍थल पर जाने से पूर्व एक माला इस मंत्र की अवश्‍य जपें।

इस प्रकार
करते रहने रोजगार की समस्‍त बाधाएं नष्‍ट होकर आश्‍चर्यजनक रूप से व्‍यापार चल
निकलता है यह यह सिद्ध प्रयोग है।


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