राष्‍ट्र निर्माण में विद्यार्थियों का योगदानRashtra Nirman essay in hindi ! Rashtra nirman mein yuvaon ki bhumika

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Rashtra Nirman essay in hindi ! Rashtra nirman mein yuvaon ki bhumika


राष्‍ट्र निर्माण में विद्यार्थियों का योगदान । Rashtra nirman mein yuvaon ki bhumika




राष्‍ट्र निर्माण से क्‍या आशय है । rashtra nirman se kya aashay hai ।rashtra nirman kya hai ।rashtra nirman ka kya art

राष्‍ट्र निर्माण से आशय है कि राष्‍ट्र को सकारात्‍मक विकास की ओर अग्रसर करने मे प्रेरित करना। राष्‍ट्र निर्माण किसी राष्‍ट्र की वर्तमान एंव भविष्‍य के संचालन की प्रथम पहलू होता हैं। राष्‍ट्र निर्माणअंतर्गत सभी आवश्‍यकता तत्‍व जैसें देश की एकता अंखडता शिक्षा आधारभुुत संसाधन मानव मूल्‍यता आदि को सकारात्‍मकता की ओर सुचति करता है।

 विद्यार्थी ही राष्‍ट्र की आधारशिला हैं। उनमें जिज्ञासा और उत्‍साह की
भावना भरी रहती है। देश के प्रति जागरूक रहना उसका पुनीत कर्तव्‍य है। वे ही देश के
भावी नागरिक एवं कर्णधार हैं। राष्‍ट्र के निर्माण के लिए जिस त्‍यागी की आवश्‍यकता
होती है उसे विद्यार्थी पूरी करते आये हैं। तारीख इस बात की गवाह है कि राष्‍ट्रीय
आंदोलन को नया मोड़ देने का कार्य विद्यार्थी वर्ग ने ही किया है। आज हमें अपने राष्‍ट्र
का नव निर्माण करना है। राष्‍ट्र के स्‍वरूप में परिवर्तन लाना है। सदियों का दासता
का पश्‍चात हमारा राष्‍ट्र नव निर्माण की ओर अग्रसर हो रहा है। अत:  हमें ऐसे विद्यार्थियों और नवयुवकों की आवश्‍यकता
है जो नि: स्‍वार्थ भाव से देश की सेवा कर सकें। जो देश का नव निर्माण करने में अपना
सहयोग दे सकें। जब तक राष्‍ट्र बाहरी आक्रमण से सुरक्षित नहीं होगा तब तक नव निर्माण
की आशा नहीं की जा सकती । अत: सर्वप्रथम राष्‍ट्र की सुरक्षा का प्रश्‍न हमारे समाने
आता है। कभी कभी विदेशी शक्तियां इस प्रकार की स्थिति पैदा कर देती हैं जिससे राष्‍ट्र
की सार्वर्भामिकता पर खतरा उपस्थित हो जाता है। तब राष्‍ट्र अपनी सुरक्षा की याचना
करता है। वह नवयुवकों और विद्यार्थियों का बलिदान मांगता है। अत: विद्यार्थियों का
यह परम कर्तव्‍य एवं धर्म है कि वह तन मन और धन से राष्‍ट्र की रक्षा करें।

राष्‍ट्र निर्माण और युवा शक्ति (rashtra nirman aur yuva shakti) । राष्‍ट्र निर्माण में विद्यार्थियों का योगदान । rashtra nirman mein yuvaon ki bhumika)




इस प्रकार की स्थिति में विद्यार्थियों को चाहिए कि वे जन जागरण पैदा कर
राष्‍ट्र को एकता के सूत्र में बाधंने का प्रयास करें। वे लोगों के मन में फैली
शंकाओं का निवारण करे
ं लोगो में आत्‍मबल का संचार करें, देश में धार्मिकता, प्रान्‍तीयता या जातीयता के नाम पर
पनपने वाले झगड़ो को समूल नष्‍ट कर देने का प्रयास करें।

देश के नौजवान और विद्यार्थी
अनेक बार अपने उत्‍तरदायित्‍व का परिचय दे चुके हैं। संकटकाल में धन की आवश्‍यकता होती
है। नागरिक ठीक समय पर और ईमानदारी के साथ अपने टैक्‍स जमा करें
, इसके लिए विद्यार्थियों को आगे कदम बढ़ाना चाहिए।

राष्‍ट्र निर्माण की चुनौतियां (rashtra nirman ki chunotiya) । rashtra nirman ki chunotiya

एक आदर्श विद्यार्थी ही राष्‍ट्र
की डूबती नौका कर्णधार होता है। उसके ह्दय में मंडराती आत्‍मसम्‍मान की भावना शत्रुओं
को नष्‍ट कर देती है । विद्यार्थी किसी विषम परिस्थिति में जन जन में जागरण पैदा करके
देश की ध्‍वनि को विस्‍तारित करते हैं। विद्यार्थी नागरिकों के साथ मिलकर श्रमदान के
माध्‍यम से नयी नयी सड़कों नहरों तथा बांधों के निर्माण में मदद करते हैं नयी उम्र
होने के कारण विद्यार्थियों में जोश होता है। वे दीवानापन के कारण किसी भी परि‍स्थिति
में पूरे उत्‍साह के साथ भिड़ जाते हैं। राष्‍ट्र को छात्र शक्ति पर हमेशा गर्व हुआ
है। जापनी आक्रमण के समय चीन की बनी दीवार इस बात को प्रमाणित करती है। यदि हम अपने
हीदेश से बाहर कर देना कोई साधारण सा राजनेताओं ने अंग्रेजी शासन को नाकों चने चबवा
दिये। विद्यार्थी और नागरिकों के सम्मिलित कदम ही देश की आन बान शान की रक्षा करने
में सफल्‍ हो सकते हैं।विद्यार्थियों के कर्तव्‍य पर ही देश की नींव जमना और उखड़ना
निर्भर है।




संकटकालीन स्थिति जन जीवन को
विचलित कर देती है। बुद्धि और धैर्य से उस समय पलायन कर जाते हैं जहां मनुष्‍य विवेक
खो बैठता है उस स्थिति में विद्यार्थी समाज का कर्त्तव्‍य है कि नागरिकों के साथ कदम
से कदम मिलाते हुए अपने दायित्‍व के प्रति सचेत बने रहें। आवश्‍यकता तो यह है कि इस
स्थिति में वज्र बनकर शत्रु पर टुब पड़े
, अग्नि बनकर
शत्रुओं को भस्‍म कर दें। आज हजारे राष्‍ट्र के सामने तरह तरह की समस्‍याएं विद्यमान
हैं। बढ़ती जनसंख्‍या अनैतिकता लूट अपहरण अनुशासनहीनता महंगाई घुसखोरी आदि ने देश की
नींव को खोखला कर दिया है । हमारी राष्‍ट्रीय नैतिकता दिन दिन गिरती जा रही है। ऐसी
दशा में देश के विद्यार्थियों पर बहुत बड़ा उत्‍तर दायित्‍व आ गया है। इस प्रकार किसी
भी राष्‍ट्र के निर्माण में विद्यार्थियों का अप्रतिम योगदान होता है। युग का जुआ विद्यार्थिंयों
के कंधे पर होता है हमें इस बात का नहीं भूलना चाहिए।

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