[भाषण] स्‍वतंत्रता दिवस पर भाषण independence day speech in hindi l independence day 2021

independence day speech in
hindi
  l  independence day speech । 15 अगस्‍त पर भाषण

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स्वतंत्रता दिवस पर भाषण l 15 अगस्‍त  पर भाषण हिन्‍दी में 

सबसे पहले धन्‍यवाद मुझे इस बोलने का
मौका दिया। सम्‍माननीय अतिथि गण
,
प्रभारी महोदय श्री
……….
, समिति सदस्‍य गण , समस्‍त
वरिष्‍ठ  मेरे सहकर्मी
, ग्रामवासी और मेरे प्‍यारे बच्‍चों, समस्‍त श्‍हरवासी  मैं आपको भारत का स्वतंत्रता दिवस swatantrata diwas 
की हार्दिक बधाई देता हूं।




मैं अपनी दो पंक्‍ती से शुरू करना चाहूंगा- 

स्‍पंदनहीन ह्रदय में जोश नया भरना है आज,
मातृभूमि की परवरिश का कर्ज अदा करना है आज।

शहीदों
के लहुलुहान कदम पडे़ जिन राहों पर
,
उन राहों पर , बनकर
फूल कदमों तलें बिखरना है आज।।

75 वें स्‍वतन्‍त्रता दिवस की आप सब को हार्दिक शुभकामनाएं। आज से 75 वर्ष पहले आज
के दिन
15 august 1947 day को
भारत को स्‍वतंत्र घोषित कर दिया गया।

हजारों
क्रांतिकारियों ने अपनी जान की बाजी लगा दी और वीरगति को प्राप्‍त हुए। उनके
बलिदान के फलस्‍वरूप हमें आजादी मिली आजादी की कीमत का अंदाजा इस बात से लगया जा
सकता है कि करीब 7 लाख लोनेां ने आजादी के लिए जान की बलि दे दी। हम जब आजादी के
दिवानों की कहानियां पढ़ते है तो दिल दहल जाता है। जेल में भूख हड़ताल की वजह से
जतिनदास के प्राण चले गए। भगतसिंह जो कि मात्र 22 साल की उम्र में शहीद हो गए। सुख
देव
,बटुकेश्वर दत्‍त,
राजगुरू, भगवतीचरण
बोहरा
, जैसे महान क्रांतिकारी अंग्रेजो की हत्थे चढ़ गए। जो कि
अंग्रेजो के शिकार बन गऐ।

250-300
वर्षों की लम्‍बी गुलामी से आजादी पाने में हमारें देश के लाखों लोगों की जाने गई
। अंग्रेजो से पहली लहार्ड लड्ने वाले बंगाल के नवाब सिराजुदौला से लेकर भगत सिंह
, चंद्रशेखर
आजाद
, जैसे कई महान शहीदों की कुर्बानी देकर 1947 में आजादी मिल पाई।




छत्तीसगढ़
का इतिहास
(chhattisgarh
history) में स्‍वतन्‍त्रता
के महान बलिदानी –

भारत की आजादी के आन्‍दोलन में छत्तीसगढ़ chhattisgarh के कई
महापूरूष शामिल थे जो अंग्रेजो से लड़कर आजादी में आपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई
हनुमान सिंहजो कि छत्तीसगढ़ का मंगल पांडे कहलाता है
,
 वीरनारायण सिंह
, सुन्‍दर लाल शर्मा, रविशंकर
शुक्‍ल
,खूब चंद बघेल,
प्‍यारे लाल, राधा बाई, वामन
राव लाखे
, माधवराव सप्रे, जैसे नेता आजादी की लडाई
में जुटे रहे साथ क्रांतिकारी जो कि अंग्रेजो की नाम में दम कर दिया उसमे शामिल
हैं- परस राम सोनी
, रणबीर शास्‍त्री, सुधरी मुखर्जी, क्रान्ति
कुमार भारतीय
, बिलखनारायण अग्रवाल, ईश्‍वरी
चरण शुकल
, जयप्रकाश नारायण पाण्‍डेय, रघुनन्‍दन
सिंगरौल
, रामकृषण ठाकुर आदि हजारों लोगों इस संग्राम मे अपनी
अहम भूमिका निभाई।

इनके
अलावा अंग्रेजों के खिलाफ कई आदिवासी विद्रोह हुए- जैस भुमकाल
, मुरिया
विद्रोह
, कोई विद्रोह,
मेरिया विद्रोह में अंग्रेजों को
आदिवासियों ने धूल जटा दीया।

 

मैं
खुसनसीब हु कि मुझे इस धरती में जन्‍म लेना का मौका मिला
, मै
इस धरती को प्रणाम करता हूं और धन्‍यवाद करता हूं । हिन्‍दूस्‍तान मेरा देश हिन्‍दूस्‍तान
मेरे नस नस में फैले रक्‍त की तरह है भारत वह भूमि है जिसके स्‍वाधीनता दिवस के
दिन आज मुझे ये कहते सबसे बड़ा गर्व हैं है कि ईश्‍वर ने मुझे यह मौका दिया कि इस
भूमि पर जन्‍म लेने का मौका दिया।

 

  • 15 august 1947 को जब लाल किला की प्राचीर से तिरंगा लहराया।
  • 15 august 1947 जब हमने आजादी का सुख प्राप्‍त किया।
  • 15 august 1947 जब इस देश ने अपने को आजाद एवं मुक्‍त पाया।
  • 15 august 1947 जब हमने सबने यह सपना देखा कि हम विश्‍व का महान लोकतंत्र
    बनेंगे।
  • हमें
    गर्व है कि  हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतन्‍त्र
    प्रजातंत्र का हिस्‍सा है हमें गर्व है कि हम सब पूरे भारतवासी यह
    भारत
    का स्वतंत्रता दिवस
    15 august independence day का महान पर्व मना रहे हैं।



यह
दिवस उत्‍सव है यह दिवस शहीदों को याद करने का दिन हैं हमारे स्‍वतन्‍त्रता दिवस
swatantrata
diwas 
के स्‍वतन्‍त्रता के सेनानि जिन्‍होंने फांसी से
चढने पर अपनी उम्र नही देखी
, स्‍वतन्‍त्रता के सेनानि ने गोली झेलने के पहले यह
नही देखा की मेरे मरने के बाद उनके परिवार का क्‍या होगा। हमारे स्‍वतन्‍त्रता के
सेनानि जिन्‍होने आन्‍दोलन करने के पहले यह नहीं सेाचा की हमारे बाद उनके परिवारों
का क्‍या होगा वह स्‍वतन्‍त्रता सेनानी जिन्‍होने इस आजादी की नींव डाली आइऐ हम सब
उनको याद करके बोले भारत माता की जय वन्‍दे मातरम।

 

thoughts on independence day in
hindi

1-वतन हमारा ऐसे ना छीन पायें कोई , रिश्‍ता हमारा ऐसे ना जोड़ पाए कोई,

दिल
हमारे एक है  एक है हमारी जान
, भारत
हमारा है हम है इसकी शान
,

स्‍वतन्‍त्रता
दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

 

2-आओ
झुक कर सलाम करें उनको जिनके हिस्‍से में ये मुकाम आता है।

खुशनसीब
होता है वह खून जो देश के काम आता हैं।।

स्‍वतन्‍त्रता
दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।


3-वतन
हमारा ऐसे ना छीन पाये कोई
, रिश्‍ता हमारा ऐसे ना जोड़ पाऐ कोई,

दिल
हमारे एक है एक है हमारी जान
, भारत हमारा है हम है इसकी शान ।।

 

समय
कम होने के कारण मैं अपनी शब्‍दों को कम करते हुए आप सब से पूछता हूं कि देश के महान
लोगों ने तो अपनी बलिदानी दी मगर हमने अपने देश के लिए क्‍या किया अपने समाज को क्‍या
दिया। अपने परिवार के लिए कौन सा अहम काम किया । आज हमें देश के‍ लिए क्‍या करना चाहिए।
हम चाहते है कि देश हमारे लिए कुछ करें तो क्‍या हम नहीं चाहते कि हम देश के लिए कुछ
करें। हमारे सैनिक देश के जवान देश के बार्डर पर ड्यूटी करते है वे यह नहीं देखते कि
आज गर्मी ज्‍यादा है या आज बर्फ गीर रही है या बारिश हो रही तो मैं छूट्टी ले लू। ऐसा
नहीं है वे लगातार देश की रक्षा में तन मन धन न्‍यौधावर कर देते हैं। हमें अपने समाज
देश के राष्‍ट्रीय धरोहर को बचाकर अपने देश की तरक्‍की में आगे आकर देश का नेतृत्‍व
करना चाहिए।

अन्‍त
में एक पंक्त कहकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा।




 

मेरा
दिल मेरी धड़कन मेरी जान हो तुम
,
अब तो मेरे वजूद की पहचान हो तुम

मै
तो हर बार गर्व से ही सर उठाकर कहता हूं ऐ मेरे भारत देश महान हो तुम।

धन्‍यवाद
वन्‍दे मातरम।

जय
हिन्‍द जय भारत जय छत्तीसगढ़


swatantrata diwas कविता

आओं भारत देश का सम्‍मान करें

शहीदों की कुर्बानी याद करे

समझे हम सब कर्त्तव्‍यों को मिलकर

आओं हम स्‍वतन्‍त्रता दिवस का सम्‍मान
करें।

भारत के स्‍वतन्‍त्रता का सारे जग
में माग हैं

दशकों से खिल रही उसकी अद्भूत शान
हैं।

सब धर्मो को देखकर रचा गया इतिहास

इसीलिए हर देश वासी को इसमें है विश्‍वास

न जीयों धर्म के नाम न मरो धर्म के
नाम पर

इंसानियत ही है धर्म वतन का बस जियों
वतन के नाम पर

चलों फिर से आज वह नजारा याद कर लें।

शहीदों के दिल में भी वह ज्‍वाला
याद कर लें।

जिसमें बहकर आजादी पहुंची थी किनारे
पर

देश भक्तों के खून की धारा याद कर
लें।

वतन हमारा ऐसे न छोड़ पाये कोई रिक्‍ता
न हमारा ऐसे तोड़ पाये

कोई दिल तो हमारा एक है एक है हमारी
जान

हिन्‍दूस्‍तान हमारा है और हम है
इसकी जान

नफरत बुरी हैं न पालों इसे दिलों
में जो खालिस है निकालों इसे न तेरा न मेरा न इसका न उसका ये सबका वतन है सम्‍भालों
इसे

इतनी सी बात हवाओं को बताए रखना

रोशनी होगी चिरागों को चलाए रखना।

लहु देकर की है जिसकी हिखाजत हमनें

ऐसे तिरंगे की हमेशा अपने दिल में
बसाए रखना।

नही सिर्फ जश्‍न मनाना नही सिर्फ
झंडे लहराना।

यह काफी नहीं है वतन पर , यादों को नही भुलाना

जो कुर्बान हुए थे उनके लफजों को बढ़ाना

खुद के लिए नहीं जिंदगी वतन के लिए लुटाना

मेरा दिल मेरी धड़कन मेरी जान हो तुम

अब तो मेरे वजूद की पहचान हो तु

मैं तो हर बार गर्व से ही सर उठाकर कहता हूं।

ऐ मेरे भारत देश महान हो तुम।।

 

सोचता हूं क्‍या दे पाउंगा जो मैनें पाया है इस देश से क्‍या मै कभी चुका पाउंगा
जो मैने पाया है इस देश से।

फैलाना है मुझे देश सम्‍मान की भावना शायद इस तरह नजर मिला पाउं इस देश से।

खोया है हर नागरिक जाने किस होड़ में।

दिलाना है याद उसे इस देश की।।

मौका है स्‍वतंत्रता दिवस मिल के सुंदरता बढ़ाना है इस देश की।


best independence hindi song
lyrics

song-1

ऐ मेरे प्‍यारे वतन , ऐ मेरें बिछड़े चमन

तुझपे दिल कुर्बान

तु ही मेरी आरजु, तु ही मेरी
आबरू तु ही मेरी जान

ऐ मेरे प्‍यारे वतन……………………….दिल कुर्बान

तेरे दामन से जो आऐ उन हवाओं को सलाम

चू लू मै उस जुबा को जिसपे आऐ तेरे नाम

सबसे प्‍यारी सुबह तेरी सबसे रंगी तेरी शाम

तू ही मेरी आरजु……………………. मेरी जान

मॉका दिल बनके कभी सिने से लग जाता है तू

और कही नन्‍हीं सी बेटी बन के याद आता है तू

जितना याद आता है मुझको उतना तड़पाता है तू

तुझपे दिल कुर्रान तु ही मेरी आरजु तु ही मेरी आबरू तू ही मेरी जान।।

song-2

मेरी जान से प्‍यारे तुझको तेरा
देश पुकारा जा

जा भैया जा बेटा जा मेरे यारा जा

देखो वीर जवानों अपने खुन पे यह
इल्‍जाम न आये

माना कहे के मेरे बेटे वक्‍त
बड़ा तो काम न आये।

देखो वीर जवानो…………………….

हम पहले भारत वासी फिर हिन्‍दू
मुस्लिक सिख इसाई

हम पहले भारत वासी

नाम जूदा है तो क्‍या भारत मां
के सब बेटे है भाई
,

अब्‍दुल उसके बच्‍चों को पाले जो
घर वापस राम न आये

देखो वीर जवानों……………………….

अंधा बेटा युद्ध पे चला तो ना जा
न जा उसकी मां बोली वो बोला कम कर सकता हूं मै भी दुश्‍मन की एक गोली जिक्र शहीदों
का हो उनमें मेरा नाम न आऐं।

देखों वीर जवानों…………………

दोस्‍तो भारत में 15 अगस्‍त का महत्‍व बहुत ही ज्‍यादा है । एकता का प्रतिक है यह पर्व । इसके बारे में इस पोसट में Swatantrata Diwas Par Bhashan hindi me में बताया गया । स्‍वतंत्रता दिवस के लिए भाषण का यहां बड़ा अचछा वर्णन किय गया है। जो कि हिन्‍दी में हैं। 

भाषण -2 स्‍वतंत्रता दिवस पर भाषण हिन्‍दी में 

भारत की पहचान पहले 1757 से 1947 तक ब्रिटिश भारत के रूप में थी । उसके बाद 15 अगस्‍त 1947 के बाद भारत स्‍वतंत्र के रूप में आजाद हुआ। इसका मतलब है कि भारत की अपनी संविधान एवं नीति और अपने लोगों के द्वारा शासन का संचालन करना। पर आजादी पाना इतना आसान न था। इसके लिए हजारों क्रांतियां हुए हजारों शहीद हुऐ इन सब के राष्‍ट्रवाद के कारण भारत अंग्रेजो से मुक्‍त हुआ। उन्‍होने अपने शासन को भारत से हटा दिया।अंग्रेजो ने 15 अगस्‍त 1947 को मुक्‍त राष्‍ट्र की भारतीय जनता को सुपुर्द कर दिया तब से इस दिन को शहीद के बलिदानसाहसएवं राष्‍ट्र नेता को याद करने के लिए मानाया जाता है इस स्‍वतंत्रता दिवस independence day 2021 को हम मना रहे हैं।

मातृभुमि की गान से गूंजता रहे गगन।

स्‍नेह नीर से सदा फूलते रहें सुमन।।

तुम जिधर चरण धरोजीत का वरण करो।

आज आसमान परशान से बढ़े चलो।।

 

15 अगस्‍त 1947 से पहले 31 दिसंम्‍बर 1929 को रात के 12 बजे जवाहर लाल नेहरू ने लाहौर में रावी नदी के तट पर ए‍कत्रित जन समुदाय के सामने तिरंगा फहराते हुए घोषणा किया गया कि स्‍वतंत्रता आंदोलन को का लक्ष्‍य पूर्ण स्‍वराज्‍य है। एंव य‍ह निर्णय किया गया कि भारत के लोग 26 जनवरी 1930 को आम साभाओं द्वारा इस दिन को स्‍वतंत्रता का दिन घोषित किया गया। उस‍ दिन के ऐतिहासिक महत्‍व के कारण ही 1949 को भारते ने नया गणतंत्रीय संविधान तैयार किया।  

15 अगस्‍त को स्‍वतंत्रता दिवस के रूप में मानाया जाता है क्‍यो कि 15 अगस्‍त का निर्णय लॉर्ड माउंटबेटन उस समय के वायसराय ने लिया था। द्वितीय विश्‍व युद्ध (world war 2) के दौरान 15 अगस्‍त 1945 को ही जापान की सेना ने आत्‍मसमर्पण कर दिया था। भारत को 15 अगस्‍त को स्‍वतंत्रता मिली। आजादी के बाद पहली बार आधिकारिक रूप्‍ से राष्‍ट्रीय ध्‍वज ऑस्‍ट्रेलिया में भारत के तत्‍कालीन उच्‍चायुक्‍त sir raghunath paranipe के घर पर फहराया गया । भारत के स्‍वतंत्र होने के समय इंग्‍लैण्‍ड के प्रधान मंत्री क्‍लीमेंट एटली जो लेबर पार्टी थे। भारत के अलावा दक्षिण कोरियाबहरीन और रिपब्लिक ऑफ कांगो को भी 15 अगस्‍त की तिथि को ही स्‍वतंत्रता मिली। दक्षिण कोरिया को वर्ष 1945 में बहरीन को 1971 में और रिपब्ल्कि ऑफ कांगो को 1960 में स्‍वतंत्रता मिली।

3 जून 1947 को निश्‍चित किया गया कि 15 अगस्‍त को स्‍वतंत्रता दी जाएगी तो भारतीय के ज्‍योतिषों ने इस पर आपत्ति दिखाई उनके अनुसार यह दिन देश के लिए शुभ नहीं है। लेकिन लार्ड माउंटबेटन तो इसी दिन के लिए एक मत थेइसलिए ज्‍योतिषो ने कहा कि स्‍वतंत्रता का समय 14 अगस्‍त रात 12 बजे होक्‍योंकि भारतीय मान्‍यता के अनुसार अगले दिन सुर्योदय से दिन आरंभ माना जाता है इसलिए 15 अगस्‍त के अशुभ दिन से बचा जा सके।और अंग्रेज मानते थे कि रात 12 बजे से दिन बदल जाता है। इस प्रकार लॉर्ड माउंटबेटन की राय भी सर्व मान्‍य किया गया । 

स्‍वतंत्रता दिवस का महत्‍व को शब्‍दों में बया नही कर सकते है।स्‍वतंत्र देश की अपनी पहचान एवं अस्मिता होती है।अपनी संविधान कानुन अपनी संस्‍कृति अपनी भावनाऐं एवं जनता का समर्थन होता है। हर देश कभी किसी का गुलाम हो सकता है क्‍यों कि किसी देश की सैनिक क्षमता कमजोर होने से अन्‍य शकित्‍शाली देश उन पर हमला कर उस पर कब्‍जा कर सकते है एवं अपने कानुन एवं अधिकार उन पर थोप देते हैं। तो कुल मिलाकर स्‍वंतत्रता दिवस का अपना ही महत्‍त्‍व होता है। स्‍वतत्रंता दिवस का अर्थ शहीद योगदान बलिदान कालक्रम कई चीजों पर आधारित होता है। इस लिए इस दिन को खास बनाने के लिए स्‍वतंत्रता दिवस को भारी उत्‍साह से मनाया जाता है। भव्‍य कार्यक्रम होते हैं छोटे बच्‍चों को इसका महत्‍व बताया जाता है इसके देश के इतिहास को फिर से या द किया जाता हैं। सामान्‍यत- भारत में हर स्‍कुलकार्यालयों में स्‍वतंत्रता दिवस को मनाया जाता है इस दिन देश के प्‍यारे झंडे को फहराया जाता है राष्‍ट्र के गान को सामुहिक रूप से गाया जाता है सांस्‍कृतिक कार्यकम होते हैं। भव्‍य तैयारी की जाती हैं। स्‍कूल में प्रभात रैली होती हे बच्‍चें अपनी तैयार किये कार्य को प्रस्‍तु‍त करते हैं। आज के दिन एक जुठता भाई चारें को नमुना प्रत्‍यक्ष रूप से देखा जा सकता हैं। 

विश्‍व के पश्चिमी देशों में भारत को सोने की चिडि़या कहा जाता था। जिसके कारण विदेशी व्‍यापार करने के लिए भारत आने लगे। समुद्र मार्ग से पुर्तगालीडचफ्रांसीसी आदि आये। 31 दिसम्‍बर 1600 को ब्रिटेन महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने भारत मे व्‍यापार करने शाही अधिकार दिया। इसके साथ भारत में ब्रिटिश ईस्‍ट कम्‍पनी की स्‍थापना हुई। उन्‍होंने यहां की परिस्थितयों का लाभ उठाकर , व्‍यापार के साथ की राजनीतिएवं सांस्‍कृतिक रूप से प्रभुत्‍व बढ़ाया । साथ अंग्रेजी का प्रचार किया। भारत में कई प्रकार के सुधार कार्यक्रम एवं धर्म आन्‍दोलनों के परिणाम पुनर्जागरण के विस्‍तार हुआ। भारतीयों में राजनीतिक चेतना एवं जागृति की परिणति 1857 की क्रांति हुई। क्रांति के बाद सुरक्षा कवच नाम से भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस की स्‍थापना हुए।भारतीयों के प्रयास तथा अंग्रेजों के आर्शीवाद का ही फल था कि भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस का जन्‍म हुआ यह बहु प्रान्‍तीयबहुधर्मीतथा बहुजातिय थी। इसका संगठन , स्‍वरूप एवं चरित्र राष्‍ट्रीय था। 1885 से 1905 ई के समय तक कांग्रेस का जनाधार व्‍यापक नही था। इसके बाद राष्‍ट्रवादियों ने राष्‍ट्रीय आन्‍दोलन को सुदृढ़ नींव डाली और ऐसे मार्ग का निर्माण किया जिस पर चलकर आजादी प्राप्‍त की जा सकें। उदारवादी नेताओं ने भारतीय समाज के पुन निर्माण पर बल दिया। उन्‍नीसवीं सदी के अन्‍त में भयंकर अकाल और उसके परिणाम स्‍वरूप गंभीर संकट आया। प्‍लेग के भीषण प्रकोप से काफी लोग मरे। इसी समयविशषत: बंगाल के शिक्षित लोगों के बीचबेकारी काफी बढ़ गई थी।

इसलिए ये बेकार शिक्षित युवावर्ग नरमदल से विमुख होकर उग्रवाद की ओर आकर्षित हुए। 1905 के बाद यह आन्‍दोलन राष्‍ट्रवाद में प्रमुख गया।कर्जन की निति और 1905 में हुआ बंगाल का विभाजन से भारतीय जनता चकित रह गई। बंगाल के विभाजन विरोधी आन्‍दोलन में सभी विचारधाराओं के राष्‍ट्र वादियों ने भाग लिया । 1907 में सुरत में कांग्रेस अधिवेशन का विभाजन हो गया। इसके बाद एक वर्ग जो कि भाषण देनेप्रस्‍ताव पास करने वाली नीति से शांति से आंदोलन कर रही थी। वही दूसरी ओर कुछ लोग हिंसा से सक्रिया विरोध कर रहे थे। इसके साथ राष्‍ट्रवादियों में आत्‍म विश्‍वास की भावना लगातार पैदा हो रही थी।ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीति लागु कि जैसे- 1907 में राज विरोधी सभी प्रतिबन्‍ध अधिनियम, 1908 में समाचार पत्र अधिनियम लागू किया आदि।

स्‍वतन्‍त्रता को सार्थक करने,

कण कण में चेतना भरने

आज पूरा देश खड़ा है।

 

स्‍वंतत्रता संघर्ष में क्रांतिकारियों का भी विशेष योगदान रहा । क्रांतिकारियों में अदम्‍यसाहसवीरता त्‍याग बलिदान एवं देश के प्रति समर्पण भाव आदि कूट कूट भरी थी। अपने प्राणों की बाजी लगाकर अंग्रेजो की हत्‍या करना , ट्रेन में डकैतियां डालना,बम विस्‍फोट आदि ऐसे अनेक साहसिक कार्य किये गये। क्रांतिकारी मरने से नहीं डरते थे उनका मानना था कि व्‍यकित पुराना वस्‍त्र धारण कर नया वस्‍त्र पहनता है वैसे ही शरीर से आत्‍मा भी है तो मरने से क्‍या घबराना । क्रांतिकारियों ने साहित्‍यपत्र पत्रिकाओंपर्चों तथा न्‍यायालयों में दिये भाषण के माध्‍यम से राष्‍ट्रीयता एवं क्रांति की भावना जगाते थे। भगत सिंह ने उस समय सेट्रल जेल बम काण्‍ड 1929 किया । ऐसी घटना से परेशान होकर एवं क्रांतिकारी आंदोलन को दबाने के लिए सरकार भय तथा लालच दिखाकर कुछ विश्‍वासघाती भारतीय नवयुवकों को मुखबिर बनालेती है। महान क्रांति‍कारी देशभक्‍त शचीन्‍द्रनाथ सान्‍याल ने हिन्‍दुस्‍तान प्रजा‍तांत्रिक संघ एवं भगत सिंहचन्‍द्रशेखर आजादने हिन्‍दुस्‍तान समाजवादी प्रजातांत्रिक संघ संगठन का निर्माण किया । क्रांतिकारियों द्वारा हिंसक गतिविध्यिों के कारण उसे ब्रिटिश सरकार ने आतंकवादी माना। मगर वे आतंकवदी नहीं थे क्‍यों कि वे निरपराध्यिों की हत्‍या नहीं करते थे। मातृभुमि की मुकित के लिए किये गये त्‍याग एवं बलिदान के कारण ही चापेकर बन्‍धुवीर सावरकरशचीन्‍द्रनाथ सान्‍यालभगत सिंहचन्‍द्रशेखर आजादसूर्यसेन आदि क्रांतिकारी नेता देश में लोकिप्रिय हुए। 23 मार्च 1931 को भगत सिंहराजगुरूसुखदेव को फांसी दी गयी।उस समय भारत के हजारों घरों में कई दिनों तक शोक मनाया गया।

हिंसक गतिविधियों के बाद भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस ने महात्‍मा गांधी के नेतृत्‍व में अहिंसात्‍मक आन्‍दोलनों एवं नैतिक साधनों द्वारा स्‍वतंत्रता संघर्ष को आगे बढ़ाया। अन्‍त: 15 अगस्‍त 1947 को अंग्रेजो से भारत को राजनीतिक दबाव एवं आंदोलन के जिरिऐ आजादी दिलाई गयी। वास्‍तव में भारतीय स्‍वतंत्रता संघर्षपार्टी विशेष अथवा आन्‍दोलन विशेष का परिणाम न होकर विविध राष्‍ट्रवादी शक्तियों के सतत् संघर्ष एवं योगदान का परिणाम था।


देश भक्ति गीत लिखित 2021 । देश भक्ति गीत । 15 august poem in hindi  । देश भक्ति के गाने । स्‍वतंत्रता दिवस पर कविता, शायरी , गीत  

दोस्‍तों इस स्‍वतंत्रता दिवस 2021 independence day 2021 में विशेष कविता इस पोस्‍ट में प्रस्‍तुत किया गया है। इसके अंतर्गत देश भक्ति कविता (desh bhakti kavita) स्‍वतंत्रता दिवस शायरी (independence day shayri), देश भक्ति गीत लिखित 2021 देशभक्ति गाना इस पोस्‍ट में लिखित रूप में हैं। 

independence day shayri ।  independence day shayari in hindi

भारत भुमि

मगल करणी संकट हरणीदेती पुण्‍य पियूष सर्वदा।

तेरी सेवा सदा करेंगेकोटि कोटि भारत भूमि।।

 

सिंधु की हर लहर चरण पखारतीनदियां करती श्रृंगार।

सिकंदर भागा हारा मान,धन्‍य देश धन्‍य हिन्‍दुस्‍थान।।

 

भारत मां

तु शुद्ध है तु बुद्ध है तु है प्रेम का सागर।

भारत मां तेरी जय हो है कोटी नमस्‍कार।।

 

नहीं किसी के सामने हमनेशीश झुकाया है।

जो हमसे टकराने आयाकाल उसी का आया है।।

तेरा वैभव सदा रहे मांजय वन्‍दे मातरम्।

जय वन्‍दे मातरमजय भारत मातरम्।।

 

 

रूक न पाये तुफानों में सबसे आगे बढ़े कदम ।

जीवन पुष्‍प चढ़ाने निकले माता के चरणों में हम।।

जय वन्‍दे मातरम्जय भारत मातरम।

 

जहां राम ने जन्‍म लियाजहां कृष्‍ण ने दर्श दिया।

अवतारों ने जन्‍म लियाहम सब ने गर्व किया।

 

जाग उठे हम फिर से देखोविजय ध्‍वज फहराने।

नया जोश भरकर चले है देखोमाता के कष्‍ट मिटाने।।

जिनके पुरखे महा यशस्‍वीवे फिर क्‍यों घबरायें।

जिनके सुत अतुलित बलशालीशौर्य गगन पर छाये।

 

हम धूल लगाकर मस्‍तक पर सौगन्‍ध देश की खाये है,

सौगन्‍ध हमें आजादी की,इस धरती पर जनमाये हैं।

सौगन्‍ध हमें है पुरखों कीजिनके गुण रक्‍त समाये हैं।

 

सदैव से महान जो सदैव ही महान वो,

कोटि कोटि कंठ से अखण्‍ड वंद गान हो,

व्‍यक्ति व्‍यकित के ह्दय समष्टि भाव को जगा,

कामना और स्‍वार्थ के हेय भाव को मिटा।

 

उपकारों का मोह नहीं जयकारों की परवाह नहीं

अहंकार से दूर रखेंगेप्रभु का सदा सहारा हैं

भारत हो वैभव से भरीजीवन लक्ष्‍य हमारा है।

                                                                                                                                        

deshbhakti ka gana । देश भक्ति गीत लिखित 2021। देश भक्ति गीत

सुरज बदल चन्‍दा बदले बदल जाये ध्रुवतारा।

पर भारत की आन न बदलेयह संकल्‍प हमारा।।

उन्‍नत शीश हिमालय जिसकावह झुकना क्‍या जाने।

जो श्‍कारि रिपु दमन विजेतावह डरना क्‍या जाने।

अब संभले वह शत्रु नराधमजिसने है ललकारा।।

देवा सुर संग्राम जयी होमहाबली जग माता।

रावण कंस असुर संहारकसजय धर्म निर्माता।

इस स्‍वदेश के हम सपूत हैंसाक्षी है जग सारा।।

मिली चुनौती जब भी हमकोउसे सदा स्‍वीकार किया ।

शीश चढ़ा कर मातृ भुमि का नित्‍य नया श्रुंगार किया ।

वही शक्ति अब भी अक्षय है बदलेंगे युग-धारा।

 

मांग रहा बलिदान वतन।

हो जाओ तैयार साथियोंहो जाओ तैयार ।।

अर्पित कर दो तन मन धन मांग रहा बलिदान वतन।

अगर देश के काम न आयेतो जीवन बेकार।

सेाचने का समय गया उठो लिखो इतिहास नया।

बंसी फेंको और उठा लोहाथों में तलवार ।

तूफानी गति रूके नहींशीश कटे पर झुके नहीं।

उठे हुए माथे के सममुख ठहर न पाती हार।

कांप उठे धरती अम्‍बरऔर उठा लो उंचा स्‍वर।

कोटि- कोटि कंठों से गूंजेभारत की जयकार।


 

हम भारत की शान हैं

आन है शान हैं हम भारत की शान है।

पुरूषोत्‍तम मर्यादा धारीद्वापर में हम कृष्‍ण मुरारी।

हर युग में कर धर्म ध्‍वजा ले वैजयन्ति गल माल हैं।

वीर शिवा राणा अभिमानीगुरू गोविन्‍दसिंह थेबलिदानी।

बन्‍दा वैरागी जैसों के तेजस्‍वी हम लाल हैं।

नाना तात्‍या रानी झांसी प्रलयंकर बन चूमी फांसी

पाण्‍डे मंगल कुका फड़के धधक उठे वे ज्‍वाला हैं।

दयानन्‍द अरविन्‍द विवेकाएक तत्‍व के रूप अनेका,

दिव्‍य ज्‍योति केशव माधव की स्‍पन्दित हर प्राण हैं।

 

 

हम भारत मां के प्‍यारे।

हम आजादी के रखवालेबाधाओं की परवाह नहीं।

हम भारत मां के सुत प्‍यारेपद यश की हमको चाह नहीं।

हम उस कानन के वासी हैं आजादी जिसमें खिलती है,

समरस जीवन की गंगा कीधारायें पग-पग मिलती हैं,

हम शाश्‍वत पथ के राही है छल कपट हमारी राह नहीं

हम शांति प्रणेता शक्ति सुवनसत पथ पर निशिदिन बढ़ते हैं।

गिरी प‍र्वत नदी दरारों में हम निर्भय होकर चलते हैं।

लहरों की छाती चीर चले कुछ संकट सिंधु अथाह नहीं।

मुस्‍काते हरदम रहते हैं मन में सुलगायें चिनगारी

आदर्शों की भीषण ज्‍वालाभस्मित करती जड़ता सारी।

पर अमृत हम छलकाते हैं फैलाते अन्‍तर्दाह नहीं।

 


जो हमसे टकराने आया

वन्‍दे मातरम् वन्‍दे मातरम् वन्‍दे मातरम् ।

भारत वन्‍दे मातरमजय भारत वन्‍दे मातरम्।

रूक न पाये तुफानों में सबके आगे बढ़े कदम।

मस्‍तक पर हिमराज विराजितउन्‍नत माथा माता का ।

चरण धो रहा विशाल सागरदेश यही सुन्‍दरता का ।

हरियाली साडी पहने मांगीत तुम्‍हारे गाये हम ।

वन्‍दे मातरम्…….

नदियन की पावन धारा है मंगल माला गंगा की

कमर बंध है विंध्‍याद्रि का सतपुड़ा की श्रेणी की ।

सह्यद्रि का वज्रहसत हैपौरूष को पहचानें हम।

वन्‍दे मातरम्…….

नहीं किसी के सामने हमनेअपना शीश झुकाया है।

जो हमसे टकराने आया काल उसी का आया है।

तेरा वैभव सदा रहे मांविजय ध्‍वजा फहरायें हम।

वन्‍दे मातरम्…….

 

प्‍यारा देश हमारा है-

सब देशों से न्‍यारा हैप्‍यारा देश हमारा है

जिस धरती पर जन्‍म लियाजिस पर पलकर बड़े हुए

जननी से भी बढ़कर है प्‍यारा देश हमारा देश

जहां राम ने जन्‍म लियाजहां कृष्‍ण ने दर्श दिया।

अवतारों का जन्‍म स्‍थलप्‍यारा देश हमारा हैं।

कभी सुखी था यह भरपुर दु-ख से है अब चकनाचुर

निश्‍चय ही विश्‍व गुरू बनेगा प्‍यारा देश हमारा देश।

जीवन से भी बढ़कर है प्‍यारा देश हमारा देश।


 

जननी जन्‍म भूमि स्‍वग से महान है।

जननी जन्‍मभूमि स्‍वर्ग से महान है

इसके वास्‍ते ये तन है मन है औ प्राण है

इसके कण कण में लिखा राम कृष्‍ण नाम है

हुतातमाओं के रूधिर से भूमि शस्‍य श्‍याम है।

धर्म का ये धाम है सदा इसे प्रणाम है

स्‍वतंत्र है यह धरा,स्‍वतंत्र आसमान है।

इसकी आन पे अगर जो बात कोई आ पड़े।

इसके सामने जो जुल्‍म के पहाड़ हो खड़े

शत्रु सब जहान हो विरूद्ध विधि विधान हो।

मुकाबला करेंगे तब तक जान में ये जान है।

इसकी गोद में हजारों गंगा यमुना झूमती

इसके पर्वतों की चोटियां गगन को चुमती भूमि ये महान है निराली इसकी शान है

इसकी जय पताका ही स्‍वयं विजय निशान है1


 

संगठन गढ़े चलो,

संगठन गढ़े चलोसुपंथ पर बढ चलो।

भला हो जिसमें देश का वो काम सब किये चलो।

युग के साथ मिल के सब कदम बढ़ाना सीख लो।

एकता के स्‍वर में गीतगुनगुनान सीख लो।

भूल कर भी मुख में जाति पंथ की न बात हो।

भाषाप्रान्‍त के लिए कभी न रक्‍तपात हो

फूट का भरा घड़ा है फोड़कर बढ़े चलो।

आ रही हे आज चारों ओर से यही पुकार।

हम करेंगे त्‍याग मातृभुमि के लिए अपार।

कष्‍ट जो मिलेंगे मुस्‍कुराते सब सहेंगे हम।

देश के लिए सदा जि‍येंगे और मरेंगे हम।

देश का ही भाग्‍य अपना भाग्‍य है यह सोच लो।

 

मातृभूमि

हे मातृभूमि तेरे चरणों में सर नवाऊ

मैं भक्ति भेंट अपनी तेरी शरण में लाऊ

हे मातृभूमि तेरे चरणों में सर नवाऊ

माथे पे तु हो चन्‍दन सीने पे तू हो माला,

जिव्हा पर गीत तू हो मैं तेरा नाम गाउ।

हे मातृभूमि तेरे चरणों में सर नवाऊ

जिससे सपूत उपजे श्री रामकृष्‍ण जैसे

उस तेरि धूलि को मैं निज शीश पे चढ़ाऊ

तेरे ही काम आउं तेरा ही मन्‍त्र गाउ।

मन औद देह तुझ पर बलिदान मैं चढ़ाउ।

 

भारत देश हमारा है।

जान से प्‍यारा है यह भारत देश हमारा है।

भारत देश हमारा है यह जान से भी प्‍यारा है।।

मातृभुमि यह पितृभुमि यह जगती में अवतारी है।

स्‍वर्गलोक से भी बढ़कर है तीन लोक से न्‍यारी है।

चांद सितारों ने ऋतुओं ने इसका गात्र संवारा हैं।

रणवीरों ने माता का श्रृंगार किया ।

संतों ने मुनियों ने जग को ज्ञान दिया उपकार किया।

भारत माता की जय ऐसा यत्‍न हमारा है।

जान से भी प्‍यारा भारत देश हमारा है।

नदि से सीखा है हमने पल पल बढते जाना है।

दीपक से सीखा है हमने तिल तिल जलते जाना है।

जन जन में एकात्‍म जगाकर संगठन में लायें हम

परम वैभव पाने का पावन ध्‍येय हमारा है।

पावन ध्‍येय हमारा है यह जान से भी प्‍यारा भारत देश हमारा है।


भारत मां  

भारत मां तेरी पावन पूजा में, हम केवल इतना कर पायें।

युग से युग से चरणों में तेरेचढ़ते आये पुष्‍प घनेरे।

हमने उनसे सीखा केवलअपना पुष्‍प चढ़ा पाये।

भारत मां तेरी पावन पूजा में, हम केवल इतना कर पायें।

 हम भी अपने टुटे स्‍वर को उनके साथ मिला पाये।

कुछ कली चढ़ी कुछ पुष्‍प चढ़ेकुछ समय से पहले फिसल पड़े

हमको दो वरदान यही भारत मांविकसित होकर चढ़ जायें।

भारत मां तेरी पावन पूजा में, हम केवल इतना कर पायें।

मां तेरे पुजा पथ पर हम लड़ते लड़ते भिड़ते बढते जायें।

अन्तिम आकांक्षा हम सबकोजब पावन पूजा हो तेरी।

तब तनिक न पड़ असमंजस में यह जीवन पुष्‍प चढ़ा जायें।

भारत मां तेरी पावन पूजा में, हम केवल इतना कर पायें।


 

हो गये हैं स्‍वप्‍न सब साकार कैसे मान लें हम।

टल गया सर से व्‍यथा का भार कैसे मान ले हम।।

आ गया स्‍वतंत्रता फिर भी चेतना आने प पायी।

प्रगति के ही नाम श्रद्धा और श्रम को दी विदायी।

इस भयंकर मौज को पतवार कैसे मान लें हम।।

दश सारा घिर रहा है दैन्‍य के घन बादलां से।

घिर रही प्रिय मातृ भूमि है चतुर्दिक खल अरिदलों से ।

इस अमां के तिमिर को ही अरूणिमा क्‍या मान लें हम।

देश सारा घिरा रहा है दैन्‍य के घन बादलों से।

हम सभी का एक व्रत हो विश्‍व में मां की प्रतिष्‍ठा।

देश के भवितव्‍य को हीअब चुनौती मान लें हम।

 

एक नया विश्‍वास रचें हम-

एक नया इतिहास रचें हमएक नया इतिहास

डगर डगर सब दुनियां चलती हम बीहड़ में पन्‍थ बनायें।

मंजिल चरण चुमने आयेहम मंजिल के पास न जायें।

धारा के प्रतिकुल नाव रखें।

एक नया विश्‍वास रचें हम

दुर हटाकर जग के बन्‍धन बदलें हम जीवन की भाषा

छिन्‍न भिन्‍न करके बन्‍धनबदलें हम जीवन परिभाषा

अंगारों में फूल खिलाकर एक नया मधुमास रचें हम।

अम्‍बर हिले धरा डोले पर हम अपना पन्‍थ न छोड़़े

सागर सीमा भूले पर हम अपना ध्‍येय न छोंडे़।

स्‍नेह प्‍यार की वसुन्‍धरा पर एक नया आकाश रचें हम।

 

यह देश है हमारा।

इतिहास गा रहा है दिन रात गुण्‍ हमारा।

दुनियां के लोगों सुन लो यह देश है हमारा।

इस पर जनम लिया है इसका पिया है पानी

माता है यह हमारी यह है पिता हमारा।

वह देवता हिमालय हमको पुकारता है

गुण गा रही है निश दिन गंगा की नील धारा।

पोरस की वीरता को झेलम तु ही बता दें

युनान का सिकंदर था तेरे तट पे हार

उज्‍जैन फिर सुना दे विक्रम की वह कहानी

जिसमें प्रकट हुआ था संवत नया हमारा।

आता है याद हरदमगुप्‍तों का वह जमाना।

सारे जहां पे छाया वह स्‍वर्ण युग हमारा।

चितौड़ रायगढ़ चमकौर फिर गरज उठ।

सदियों लड़ा निरंतरआजाद खून हमारा।

दी क्रांतिकारियों ने अंग्रेज का चुनौती

पल पल प्रकट हुआ था स्‍वतंत्रता वह हमारा।

हम इनको भूल जायें संभव नही कभी यह इनके लिए जियेंगे यह धर्म है हमारा।

होगा भविश्‍य उज्‍जवल संसार में अनोखा

बतला रहा हमको यह संगठन हमारा

 

भारत मां का मान

भारत मां का मान बढ़ाने बढ़ते मां के मस्‍ताने।

कदम कदम पर मिल जुल गाते वीरों के व्रत के गाने।

ऋषियों के मंत्रों की वाणीभरती साहस नस नस में।

चक्रवर्तियों की गाथा सुन नहीं जवानी है बस में

हर हर महादेव के स्‍वर से विश्‍व गगन का थर्राने ।

भारत मां का मान बढ़ाने बढ़ते मां के मस्‍ताने

हम पर्वत को हाथ लगा कर संजीवन कर सकते हैं

मर्यादा बन कर असुरों का बलमर्दन कर सकते हैं

हिरणाक्ष का वक्ष चीर देंनरिसंह की दहाड़ लिये।

चक्र सुदर्शन की छाया में गीता अमृत बरसाने

भारत मां का मान बढ़ाने बढ़ते मां के मस्‍ताने

जरासंघ छल बल दिखला ले अन्तिम विजय हमारी है

भीम पराक्रम प्रगटित होनाअर्जुन का रथ हांक रहा  जो उसके हम सब दीवाने

भारत मां का मान बढ़ाने बढ़ते मां के मस्‍ताने


ध्‍येय मार्ग पर चले 

ध्‍येय मार्ग पर चले वीर तो पीछे अब न निहारो हिम्‍मत कभी न हारो।

तुम मनुष्‍य होशक्ति तुम्‍हारे जीवन का संबल है

और तुम्‍हारा अतुलित साहस गिरि की भांति अचल है

तो साभी केवल पल भर को मोड माया बिसारो हिम्‍मत कभी न हारो।

मत देखो कितनी दूरी है कितना लम्‍बा मग है

और न सोचो साथ तुम्‍हारे आज कहां तक जग है

लक्ष्‍य प्राप्ति की बलिवेदी पर अपना तन मन वारो हिम्‍मत कभी न हारो।

आज तुम्‍हारे साहस पर ही मुक्ति सुधा निर्भर है

आज तुम्‍हारे स्‍वर के साथी कोटि कंठ के स्‍वर है

तो साथी बढ़ चलो मार्ग पर आगे सदा निहारों हिम्‍मत कभी न हारो।

 

मातृभूमि गान से

मातृभुमि गान से गूंजता रहे गगन।

स्‍नेह नीर से सदा फूलतें रहे सुमन।

जन्‍म सिद्ध भावना स्‍वदेश का विचार हो

रोम रोम में रमा स्‍वधर्म संस्‍कार हो

आरती उतारते प्राण दीप हों मगन ।

स्‍नेह नीर से सदा फूलतें रहे सुमन।

हार के सुसूत्र में मोतियों की पंक्यिां

लक्ष्‍य लक्ष्‍य रूप से राष्‍ट्र हो विराट तन।

स्‍नेह नीर से सदा फूलतें रहे सुमन। 

ऐक्‍य शकित देश की प्रगति में समर्थ हो

धर्म आसरा लिए मोक्ष काम अर्थ हो

पुण्‍य भूमि आज फिर ज्ञान का बने सदन।

स्‍नेह नीर से सदा फूलतें रहे सुमन।


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