बच्चों की नजर उतारने का मंत्र। बच्चों की नजर उतारने के mantra

नजर उतारने का मंत्र  । नजर उतारने का शाबर मंत्र


कई बार बच्‍चों को नजर आदि लगने की समस्‍या उतप्‍न्‍न होत
जाती है जिससे बच्‍चा बीमार हो जाता हें उलटी
, दस्‍त बुखार
जुकाम आदि समस्‍या उतप्‍न्‍न हो जाती है। निम्‍न मंत्र से 21 बार झाड़ा देने पर नजर
उतर जाती है।


हरि हरि स्‍मरिके हय मन करूं स्थिर चाउर आदि फेक के पाथर
आडिवीर डायन दूतिन दानवी देवी के आ‍हार बलक गण पहिरे हाड गला हार राम लखण दूनो भाई
धनुष लिए हाथ देखि डायनी भागत छोड़ शिशु माय गई। पराय सब डायरी योगिनी सात समुद्र पार
में खावे खारी पानी आदेश हाड़ी दासी चण्‍डी माई आदेश नैना योगिनी के दोहाई।

उपरोक्‍त मंत्र को 21 बार पीडि़त व्‍यकित जो नजर से प्रभावित
हो के सामने पढ़े। पढ़ते समय अगरबत्ती अवश्‍य ही लगा लेवे।


नजर झाड़ने का हनुमान मंत्र-

हनुमान चलै। अवधेसरिका। वृज-मण्‍डल। धूम मचाई। टोना-टमर।
डीठि- मूठि। ।
सबको खैचि बलाय। दुहाई छत्तीस। । कोटि देवता की दोहाई लोना।।
चमारिन की ।।


विधि – इस मंत्र को ग्रहण- काल में, पवन पुत्र
हनुमान जी विषयक सभी नियमों का पालन करते हुए 10 माला का जप करें। तो यह मंत्र सिद्ध
होगा
, फिर आवश्‍यकता के समय मेार पंख से 21 बार झाड़ा करने से बालकों
को लगी नजर दूर हो जाती हैं।


नजर उतारने का हनुमान मंत्र 

मुर्गी
की चोंच के ऊपरी भाग को दूध में धोने के बाद सोने या चांदी के ताबीज में भरे फिर
ताबीज में काले रंग का रेशमी डोरा ब्रोकर उसका मुंह बंद कर दें सोमवार के दिन
 
प्रातः काल पूर्वा भी मुख बैठकर ताबीज कोअपने सामने रखकर निम्नलिखित
मंत्र का
1008 बार उच्चारण करके उसे अभिमंत्रित करें अर्थात
एक बार मंत्र पढ़ने के बाद ताबीज पर एक एक फूंक मारते चले जाएं फिर ताबीज को बालक
के गले में पहना दे इसके प्रभाव से बालक को किसी की नजर नहीं लगेगी


ॐ नमः शिवाय दृष्टि दोष विनाश नाय नमः रुद्राय नमः उमा महेश्वराय कं खं गं घं डं डिम
डिम स्वाहा।

 
 एक
पूरा नींबू लेकर श्री हनुमान जी का स्मरण
  करके निम्न
मंत्र का जाप करते हुए नजर से पीड़ित बच्चे के सिर से पैर तक उतारे किसी चौराहे पर
काट कर प्रत्येक मार्ग पर फैला दें छुरी भी चौराहे पर ही छोड़ आए बुरी नजर दूर हो
जाएगी मंत्र किस प्रकार है

 

 श्री हनुमते नमः


नजर
उतारने का अचुक मंत्र 

सूर्य
ग्रहण चंद्र ग्रहण दीपावली होली ने सिद्ध करके निम्नलिखित मंत्र से नजर झाड़े 

गुरुचरण दिया मन श्रीहरि
मोक्ष कारण देव दानव दैत्य दी खाई नरसिंह वीर आशीष अब उड़ाई अलाली पलाली चोटी चोटी
  हंकारे
फूंकारि उड़ाव मारि शलि लेकर पांव पांव टुकरियां जाए
, अनुकाए
आए
, डाईनेर दृष्टि, पलायकरा अक्षा वीर
नरा सिंह आज्ञा।


 

नजर उतारने का मंत्र  

ओं नामो भगवते श्री
पार्श्‍वनाथाय ह्रींधराणेन्‍द्र पद्यावति सहिताय आत्‍मचक्षु प्रेतचक्षु पिशाचचक्षु
सर्वग्रह नाशाय सर्व ज्‍वर नाशाय ह्रींश्रीं पार्श्‍वनाथाय स्‍वाहा ।

इस मंत्र को दीपावली के
दिन इसकी एक माला फेर कर सिद्ध कर लें फिर शुद्ध जल को इस मंत्र से सात बार
अभिमंत्रित करें रोगी को पिलाने से कैसी भी नजर लगी हो तुरंत उतर जाएगी।
 

नजर उतारने का मंत्र 

ॐ नमो सत्‍यनाम आदेश
गुरू को। ॐ नमो नजर जहां पर वीन न जानी
, बोले छल सो अमृत बानी। कहो नजर कहां से आई, यहां की ठौर तोहि कौन बताई, कौन जात तेरी का ठाम,
किसकी बेटी कहो तेरा नाम। कहां को जाया, अब ही
बस कर ले
, तेरी माया, मेरी बात सुनो
चित लगाओं
, जैसी होय सुनाउं आय, तेलन
तमोलन चुहड़ी चमारी। कायथनी
, खतरानी, कुम्‍हारी,
महतरानी राजा की रानी , जाको दोष तुम्‍हारी
सिर पर पड़े। हनुमंत वीर नजर से रक्षा करें। मेरी भक्ति
, गुरू
की शक्ति
, फुरो मन्‍त्र ईश्‍वरो वाचा। 

 
ग्रहण के समय मंत्र जप कर
सिद्ध करें और बालकों को नजर लग जाने पर मोर के पंख से झाड़े से लाभ होगा
 

 नजर
उतारने का अचुक मंत्र 

मोर का पंख क्या मोर के
पंख का झाड़ू लेकर बालक के सिर से पांव तक झाड़ दे और झाड़ते हुए इस मंत्र को
पढ़ते जाए ।

ॐ नमो सत्‍य नाम आदेश
गुरू का
ॐ नमों
हनुमंत वीर नजर को बांधे
, बावन वीर कहुरे, नजर कहां से आई। यहां की राह तोहे कौन बताई। क्‍या है जाति तेरा क्‍या है
नाम किस तरह की लड़‍की
, कहां है तेरा धाम, कहां से आई कहां तक जाए, अबहि बस करले तेरी माय।
मेरी जाति सुनो चितलाय। जैसी सुनाउ आए। तेलिन
, तमोलिन,
चुडि़ चमारिन, कायथिन, कथरानी,
कुम्‍हारीन, मेहतरानी, राजा
रानी
, जिसकी नजरे उसी के जाए पड़े प्रत्‍यक्ष देव दृश्टि
रक्षा करे।


 उक्‍त मंत्र द्वारा झार
से नजर उतर जाएगी। यदि मोर पंख नहीं तो जलती हुई अगरबत्‍ती और चाकू से भी झारा जा
सकता हैं।


नजर लगने पर इन मन्‍त्रों का प्रयोग करें।

ग्रहण के समय प्रस्‍तु मन्‍त्र को जप कर सिद्ध करें और बालकों
को नजर लग जाने पर मोर के पंख से झाड़े। इससे फायदा होगा।


ॐ नमो सत्‍यनाम आदेश गुरू को । ॐ नमो नजर जहां पर वीर न
जानी
, बोले छल सो अमृत बानी। कहो नजर कहां से आई, यहां की ठौर
तोहि कौ बताई
, कौन जात तेरी का ठाम, किसको बेटी
कहो तेरा नाम। कहां को जाया
, अब ही बस कर ले, तेरी माया, मेरी बात
सुनो चित्‍त लगाओं
, जैसी हाये सुनाउ आय, तेलन तमेालन
चुहड़ी चमारी
, । कायथनी, खतरानी, कुम्‍हारी,
महतरानी राजा की रानी, जाको दोष
तुम्‍हारे सिर पर पड़े। हनुमंत वीर नजर से रक्षा करें। मेरी भक्ति
, गुरू की शक्ति, फुरो मन्‍त्र
ईश्‍वरो वाचा।

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